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संपादकीय: कासगंज के ‘हिंदू’ लड़के को किसने मारा?

कासगंज (Kasganj) में कल एक लड़के की जान चली गई. एक सांप्रदायिक (Communal) बताए जा रहे हंगामे के दौरान पथराव हुआ, गोलियां चलीं, आगजनी हुई और इसी सब के बीच एक चन्दन गुप्ता (Chandan Gupta) मर गया. यह सब उस दिन हुआ, जब हम विधिसम्मत व्यवस्था में शामिल होने की तारीख का जश्न मना रहे […]

पुस्तक मेला विशेष: वे किताबें जिनके बिना एक ‘भारतीय’ की बुकशेल्फ हमेशा अधूरी है

विश्व पुस्तक मेले का दिल्ली के प्रगति मैदान में आज से आगाज़ हो रहा है. ऐसे में कई नई-पुरानी किताबों की चर्चा होगी. पर मैं थोड़ा ओल्ड स्कूल हूं और इस मामले में भारतीय चिंतन परंपरा की पारायण विधा को ज्यादा सही मानता हूं. जिसके हिसाब से बहुत सी किताबों को पढ़ने की बजाए कुछ […]

क्या अरविंद केजरीवाल के अंदर शुरुआत से ही सत्ता के लिये किसी भी समझौते की प्रवृत्ति रही है?

अरविंद केजरीवाल ने अरूणा राय की बात नहीं मानी। योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण समेत बहुतों ने उनकी बात नहीं मानी क्योंकि उन्हें लगा कि सोशल मीडिया के माध्‍यम से युवाओं का जो विशाल समर्थन मिल रहा है उसे सुव्‍यवस्थित आंदोलनों में बदलकर और उसका सही राजनीतिक प्रबंधन कर वैकल्पिक राजनीति खड़ा करने का प्रयोग […]

2017 चलते-चलते: साल के पांच उम्दा लेख, जिन्हें पढ़ते हुये समाज बदलने का मन होता है

1. ‘समाज सिर्फ सिक्युरिटी गार्ड्स और पुलिस के भरोसे नहीं चल सकता, आपसी भागीदारी भी बढ़ानी होती है.’ यह लेख हमारे स्वार्थी फैसलों पर हमला करता हैं जिनमें हम अपने हिस्से की दुनिया से दूसरों को खदेड़ देते हैं. नोएडा की ‘महागुन सोसाइटी’ में जब चोरी हुई तो सोसाइटी वालों ने यह फैसला लिया कि […]

टेस्ट कीजिये: आप भी किसी नेता के भक्त तो नहीं हैं?

‘भक्त’ आम तौर पर हिंदी भाषा में हिन्दू धर्म के अनुयायिओं के लिए प्रचलित एक शब्द है. यह अनुयायी बगैर किसी संदेह के किसी देव या विचार को आराध्य मान उस पर पूरा यकीन करते हैं. राजनीति में इस शब्द का चलन हुए अभी बहुत ज्यादा समय नहीं हुआ है. साथ ही राजनीति में इसका […]

1314 स्कूल बंद करने वाले शिक्षामंत्री जी, क्या यह स्कूल आपके सर्वे में नहीं दिखे थे?

दिसंबर की शुरुआत में महाराष्ट्र सरकार ने महाराष्ट्र के 1314 जिला परिषद् स्कूलों को बंद करने का निर्णय लिया. इसकी वजह थी कि इन स्कूलों में 10 या उससे कम छात्र पढ़ते हैं. सरकार केवल इतने छात्रों के लिये स्कूल का खर्च उठाने को तैयार नहीं है हालांकि कम छात्र संख्या के पीछे तर्क यह […]

नज़र: राहुल का कांग्रेस अध्यक्ष बनना सांप्रदायिक राजनीति को क्यों बढ़ावा देगा?

आजकल सुर्ख़ियों में बाबरी मस्ज़िद की ढहने की कहानी है। कुछ लोग उस दौर को याद कर अपने कारनामें पर शर्मिंदा हो रहे हैं तो कुछ अब भी उसे रामराज्य स्थापित करने की कोशिश में शानदार पड़ाव मानते हैं और कुछ उसे हिन्दू आतंकवाद की शुरुआत मानकर ‘हिन्दुत्व’ को गरियाने में लगे हैं। लेकिन मुझे […]

क्या मौजूदा सरकार कंडोम विरोधी है?

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने टीवी चैनलों को एडवाइजरी जारी की है, जिसमें कंडोम के विज्ञापनों को दिन के वक्त टेलीकास्ट करने से मना किया गया है. एडवाइजरी में स्मृति ईरानी के नेतृत्व वाले सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने कहा है कि कंडोम के विज्ञापन केवल रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक ही […]

छोटा पाकिस्तान: दंगों के दंश में डूबा एक शहर

‘कठफोड़वा’ से हमारे साथी विनय आज इस रिपोर्ट के साथ जुड़ रहे हैं. विनय हमारे संस्थापक सदस्यों में से हैं और आज तक कठफोड़वा को प्रोत्साहन और नैतिक बल देते थे. विनय सामाजिक बदलावों के लिये जमकर मेहनत करते हैं पर उन्हें एक्टिविस्ट वाली बाइनरी से विशेष प्रेम नहीं, न ही पत्रकार वाली बाइनरी से. […]

संपादकीय: जस्टिस लोया प्रकरण मीडिया, पुलिस और कोर्ट तीनों से और संजीदगी की अपेक्षा करता है

पुलिस आयेगी और मामले की जांच करेगी. यही भरोसा लोकतंत्र की रीढ़ है. ये भरोसा न होता तो चुनी हुई सरकार और लिखे हुए संविधान का कोई मतलब नहीं होता. ये भरोसा न होता तो एक बूढ़ा बाप ये नहीं कहता कि मुझे मौत का डर नहीं है, मुझे अपने बेटे के हत्यारों को पकड़वाना […]