रे की राय: बैंक वाले मजे में हैं और यह मजा सारी अर्थव्यवस्था टूटकर बिखर जाने तक चलता रहेगा

प्रकाश के रे वरिष्ठ पत्रकार हैं. भारत मे अंतराष्ट्रीय मसलों के चुनिंदा जानकर लोगों में से एक हैं. विश्व राजनीति के साथ-साथ मीडिया, साहित्य और सिनेमा पर भी आप गहरी समझ रखते हैं. _________________________________________________________________________ कार्ल मार्क्स का कहना था कि पैसा इतिहास की धारा तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है और इस पैसे […]

फिल्म रिव्यू: ‘मुक्काबाज’ उत्तर भारतीय दर्शकों के साथ किया गया अब तक सबसे बड़ा धोखा है

मेरे गुरू जी कहते हैं कि कभी भी सिनेमा की समीक्षा उसके तकनीकी पहलुओं पर नहीं करनी चाहिये. सिनेमा एक आर्ट फॉर्म है, जिसमें प्रभावोत्पादकता होती है. फिल्म रिव्यू साधारण दर्शक के लिये लिखे जाते हैं इसलिये फिल्मों की भी साहित्य और संगीत की तरह आलोचना होनी चाहिये, उनकी प्रभावोत्पादकता के लिये. इस भूमिका की […]

रे की राय: ‘पद्मावत’ देखने का प्लान करने से पहले पिछले साल की यह 25 पेंडिंग फिल्में निपटायें

प्रकाश के रे वरिष्ठ पत्रकार हैं. भारत मे अंतराष्ट्रीय मसलों के चुनिंदा जानकर लोगों में से एक हैं. विश्व राजनीति के साथ-साथ मीडिया, साहित्य और सिनेमा पर भी आप गहरी समझ रखते हैं. _________________________________________________________________________ जनवरी से दिसंबर तक चले ‘पद्मावती’ विवाद तथा सेंसर बोर्ड के फैसलों पर उठे सवालों को छोड़ दें, तो 2017 के […]

‘राष्ट्र’ में दलितों और स्त्रियों के लिए कोई स्थान नहीं है- नागराज मंजुले

दिन बहुत साधारण था। हवाओं में स्वाभाविक सी ठंड थी और मन में उम्र प्रेरित हलकी सी बेचैनी लेकिन यह सूरत तब बदल गयी जब अचानक पता चला कि नागराज मंजुले आ रहे हैं और दिलो-दिमाग पर ख़ुशी और उत्साह की एक महीन सी चादर बिछ गयी। शाम के 5 बजे एक आदमी सामने था, […]