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By Ajay Kumar

संपादकीय: सवा दो करोड़ देशवासी नहीं रहे फिर भी हम मुर्दा शांति से क्यों भरे हैं?

साल 1991 से 2001 के बीच असमिया बोलने वाले लोगों की संख्या 58 फीसदी से कम होकर 48 प्रतिशत रह गयी. बंगाली बोलने वाले लोगों की संख्या 21 फीसदी से बढ़कर 28 फीसदी हो गयी.