आईआईटी की टीम को रेलवे ट्रैक पर नहीं मिला कोई विस्फोटक, एक और फज़ीहत होने वाली है

यह ख़बर ‘द हिन्दू’ अख़बार में छपी विजेता सिंह की रिपोर्ट ‘कानपुर की रेल पटरियों पर कोई विस्फोटक नहीं: आईआईटी टीम’ को आधार बनाकर लिखी गई है. बड़े ही दुर्भाग्य के साथ कहना पड़ रहा है कि किसी भी अन्य मीडिया हाउस ने इस खबर को नहीं उठाया इसलिये इसे पढ़ने के बाद साझा जरूर […]

पढ़ें कैसे देश के वैज्ञानिकों ने ली राज्यमंत्री सत्यपाल सिंह की क्लास?

यह पत्र देश के चुनिंदा वैज्ञानिकों ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री सत्यपाल सिंह को कुछ दिन पहले उनके एक विवादित बयान के संदर्भ में लिखा है. इस बयान में सत्यपाल सिंह ने कहा था कि ़डार्विन के विकासवाद के सिद्धांत को वैज्ञानिक 30-35 साल पहले ही खारिज कर चुके हैं और इसे पाठ्य-पुस्तकों से हटा […]

संपादकीय: सवा दो करोड़ देशवासी नहीं रहे फिर भी हम मुर्दा शांति से क्यों भरे हैं?

हम असम को नहीं जानते. बस मानचित्रों, किताब के कुछ पन्नों और अख़बार की सुर्ख़ियों से असम का हल्का-फुल्का परिचय हासिल किया है. यह परिचय भी केवल नाम और राजधानी छोड़कर यादों के कोने में बहुत देर नहीं टिकता. लेकिन भारतीयता का एक जुड़ाव है, जो बिना जाने, सोचे-समझे असम से एक लगाव के रूप […]

फिल्म रिव्यू: ‘मुक्काबाज’ उत्तर भारतीय दर्शकों के साथ किया गया अब तक सबसे बड़ा धोखा है

मेरे गुरू जी कहते हैं कि कभी भी सिनेमा की समीक्षा उसके तकनीकी पहलुओं पर नहीं करनी चाहिये. सिनेमा एक आर्ट फॉर्म है, जिसमें प्रभावोत्पादकता होती है. फिल्म रिव्यू साधारण दर्शक के लिये लिखे जाते हैं इसलिये फिल्मों की भी साहित्य और संगीत की तरह आलोचना होनी चाहिये, उनकी प्रभावोत्पादकता के लिये. इस भूमिका की […]

ये आदमी आपकी मम्मी को समझा सकता है कि शनिवार को लोहा खरीदने से अशुभ नहीं होता

यह लेख मैंने अम्बर्तो के जन्मदिन पर 5 जनवरी को लिखा था, जो आप तक आज पहुंच रहा है। लेकिन ऐसी शख्सियत का आपसे रूबरू होना बहुत जरूरी है क्योंकि यह वक्त पोस्टट्रुथ के भ्रमजालों के बीच राह बनाते अम्बर्तो के विचार जानने का सबसे मुफीद वक्त है, इसलिये अभी बिल्कुल भी देर नहीं हुई […]

अगर आपके बॉस की सैलरी आपसे 40 गुना ज्यादा है तो इसे जरूर पढ़ें

हम जिन ढांचों में बंधकर इस दुनिया को चलाने का काम करते हैं, उन ढांचों की वजह से यह केवल कोरी कल्पना हो सकती है की दुनिया से विषमताओं का अंत हो जाए। लेकिन अगर इसे हल्के में लिया तो विषमताओं की खाई का जन्म होता है। इस बात को जब हम हर लहजे में […]

रे की राय: ‘पद्मावत’ देखने का प्लान करने से पहले पिछले साल की यह 25 पेंडिंग फिल्में निपटायें

प्रकाश के रे वरिष्ठ पत्रकार हैं. भारत मे अंतराष्ट्रीय मसलों के चुनिंदा जानकर लोगों में से एक हैं. विश्व राजनीति के साथ-साथ मीडिया, साहित्य और सिनेमा पर भी आप गहरी समझ रखते हैं. _________________________________________________________________________ जनवरी से दिसंबर तक चले ‘पद्मावती’ विवाद तथा सेंसर बोर्ड के फैसलों पर उठे सवालों को छोड़ दें, तो 2017 के […]

33 सर्वश्रेष्ठ कवियों की कविताएं जो आपको पढ़ना चाहती हैं

“हमारी दुनिया में, जहाँ बंदूकों की होड़ लगी हुई है, बम-बारूदों की बहसें जारी हैं, और इस उन्माद को पोसता हुआ विश्वास फैला है कि सिर्फ हमारा पक्ष, हमारा धर्म, हमारी राजनीति ही सही है, दुनिया युद्ध की ओर एक घातक अंश पर झुक गई है। ईश्वर जानता है कि किसी भी समय के मुकाबले […]

दैनिक जागरण ऐसे ही पत्रकारिता करता रहा तो तीसरा विश्वयुद्ध कभी नहीं होगा

आजकल इलेक्ट्रॉनिक और वेब मीडिया की तरह प्रिंट की पत्रकारिता भी बेहद जल्दबाजी में की जा रही है. मीडिया जगत में आपाधापी का यह ऐसा दिलचस्प दौर है, जिसमे हिंदी पत्रकारिता के सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले अखबार भी शामिल हैं. दैनिक जागरण हिंदी बेल्ट का सबसे ज्यादा चर्चित अखबार है. हम आपको इसी अखबार […]

2017 चलते-चलते: साल के पांच उम्दा लेख, जिन्हें पढ़ते हुये समाज बदलने का मन होता है

1. ‘समाज सिर्फ सिक्युरिटी गार्ड्स और पुलिस के भरोसे नहीं चल सकता, आपसी भागीदारी भी बढ़ानी होती है.’ यह लेख हमारे स्वार्थी फैसलों पर हमला करता हैं जिनमें हम अपने हिस्से की दुनिया से दूसरों को खदेड़ देते हैं. नोएडा की ‘महागुन सोसाइटी’ में जब चोरी हुई तो सोसाइटी वालों ने यह फैसला लिया कि […]