क्या वाकई मंत्री सत्यपाल सिंह और राम माधव चर्च के षड्यंत्र का शिकार हो गये?

इस दुनिया में दो तरह के लोग पाए जाते हैं। पहले वो जो मानते हैं की ईश्वर हर चीज़ का कारण है और दुनिया उसी ने बनाई है। ये लोग ‘क्रियेशनिस्ट’ या ‘निर्माणवादी’ कहलाते हैं। दूसरे वो जो मानते हैं कि पूरा ब्रह्मांड परिवर्तनशील है। जैसा ये आज है वैसा पहले नहीं था, न आगे […]

पढ़ें कैसे देश के वैज्ञानिकों ने ली राज्यमंत्री सत्यपाल सिंह की क्लास?

यह पत्र देश के चुनिंदा वैज्ञानिकों ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री सत्यपाल सिंह को कुछ दिन पहले उनके एक विवादित बयान के संदर्भ में लिखा है. इस बयान में सत्यपाल सिंह ने कहा था कि ़डार्विन के विकासवाद के सिद्धांत को वैज्ञानिक 30-35 साल पहले ही खारिज कर चुके हैं और इसे पाठ्य-पुस्तकों से हटा […]

संपादकीय: सवा दो करोड़ देशवासी नहीं रहे फिर भी हम मुर्दा शांति से क्यों भरे हैं?

हम असम को नहीं जानते. बस मानचित्रों, किताब के कुछ पन्नों और अख़बार की सुर्ख़ियों से असम का हल्का-फुल्का परिचय हासिल किया है. यह परिचय भी केवल नाम और राजधानी छोड़कर यादों के कोने में बहुत देर नहीं टिकता. लेकिन भारतीयता का एक जुड़ाव है, जो बिना जाने, सोचे-समझे असम से एक लगाव के रूप […]

खुलासा: कैसे कांशीराम के झूठ ने मायावती को उत्तरप्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया था?

कल (15 जनवरी को) मायावती का जन्मदिन था. मायावती एक दौर में दलित राजनीति की प्रमुख आवाज रही हैं पर उन्होंने वक्त के साथ अपना आधार खोया भी है. यह लेख उनके जीवन के शुरुआती दौर से रूबरू कराने के साथ ही आपको उनके व्यक्तित्व में समय के साथ आई खामियों की ओर भी ले […]

अगर आपके बॉस की सैलरी आपसे 40 गुना ज्यादा है तो इसे जरूर पढ़ें

हम जिन ढांचों में बंधकर इस दुनिया को चलाने का काम करते हैं, उन ढांचों की वजह से यह केवल कोरी कल्पना हो सकती है की दुनिया से विषमताओं का अंत हो जाए। लेकिन अगर इसे हल्के में लिया तो विषमताओं की खाई का जन्म होता है। इस बात को जब हम हर लहजे में […]

पुस्तक मेला विशेष: वे किताबें जिनके बिना एक ‘भारतीय’ की बुकशेल्फ हमेशा अधूरी है

विश्व पुस्तक मेले का दिल्ली के प्रगति मैदान में आज से आगाज़ हो रहा है. ऐसे में कई नई-पुरानी किताबों की चर्चा होगी. पर मैं थोड़ा ओल्ड स्कूल हूं और इस मामले में भारतीय चिंतन परंपरा की पारायण विधा को ज्यादा सही मानता हूं. जिसके हिसाब से बहुत सी किताबों को पढ़ने की बजाए कुछ […]

एम एस सुब्बलक्ष्मी: जो उत्तर-दक्षिण भारत की साझा गायकी में बेमिसाल रहेंगी

सुशांत कुमार शर्मा जेएनयू से हिंदी साहित्य में स्नातक करने के बाद, दिल्ली विश्वविद्यालय से एमफिल पूरी करके वर्तमान में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहे हैं। उत्तर भारत के तीन प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अध्ययन कर चुके रसिकमन सुशांत कुमार शर्मा की साहित्य, समाज और संस्कृति में गहरी रुचि है। ________________________________________________________________________ बचपन में […]

हमारे काल देस का ‘तगड़ा कवि’ – विद्रोही

कविता क्या है खेती है, कवि के बेटा-बेटी है, बाप का सूद है, मां की रोटी है मैं तब तक कवितायें पढ़ा करता था जब तक मेरी मुलाकात विद्रोही से नहीं हुई थी; रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’। उनसे मिलने के बाद मैंने कविताओं को सुनना शुरू कर दिया। कविताओं की देह शब्दों में होती है और […]