फिल्म रिव्यू: ‘मुक्काबाज’ उत्तर भारतीय दर्शकों के साथ किया गया अब तक सबसे बड़ा धोखा है

मेरे गुरू जी कहते हैं कि कभी भी सिनेमा की समीक्षा उसके तकनीकी पहलुओं पर नहीं करनी चाहिये. सिनेमा एक आर्ट फॉर्म है, जिसमें प्रभावोत्पादकता होती है. फिल्म रिव्यू साधारण दर्शक के लिये लिखे जाते हैं इसलिये फिल्मों की भी साहित्य और संगीत की तरह आलोचना होनी चाहिये, उनकी प्रभावोत्पादकता के लिये. इस भूमिका की […]

33 सर्वश्रेष्ठ कवियों की कविताएं जो आपको पढ़ना चाहती हैं

“हमारी दुनिया में, जहाँ बंदूकों की होड़ लगी हुई है, बम-बारूदों की बहसें जारी हैं, और इस उन्माद को पोसता हुआ विश्वास फैला है कि सिर्फ हमारा पक्ष, हमारा धर्म, हमारी राजनीति ही सही है, दुनिया युद्ध की ओर एक घातक अंश पर झुक गई है। ईश्वर जानता है कि किसी भी समय के मुकाबले […]

कमलेश्वर: जिनकी अदालत में गांधी, नेहरु, जिन्ना सब दोषी थे

यह लेख चमन मिश्रा ने लिखकर हमें 6 जनवरी को कमलेश्वर की जयंती पर भेजा, जिसे हम एक दिन विलंब से प्रकाशित कर सके। वर्तमान में चमन एक पत्रकार हैं। लेखन में रुचि है। ‘तान्या’ नाम की किताब लिख चुके हैं. पत्रकारिता की पढ़ाई की है। ___________________________________________________________________ कमलेश्वर प्रसाद सक्सेना यानि ‘कितने पाकिस्तान’ के लेखक […]

2017 अंतिम प्रणाम, भाग-1: कुंवर नारायण, किशोरी अमोनकर, गिरिजा देवी और कुंदन शाह

कुँवर नारायण अभी बाक़ी हैं कुछ पल, और प्यार का एक भी पल बहुत होता है… प्यार की अमरता का गान करने वाले कवि कुंवर नारायण साल 2017 के 15 नवंबर को इहलोक को छोड़ गए। कुंवर नारायण नहीं रहे लेकिन उनके शब्द जिनमें प्रेम, उम्मीद और साहस घनीभूत हैं, हमें प्रेरणा देने के लिए […]

‘राष्ट्र’ में दलितों और स्त्रियों के लिए कोई स्थान नहीं है- नागराज मंजुले

दिन बहुत साधारण था। हवाओं में स्वाभाविक सी ठंड थी और मन में उम्र प्रेरित हलकी सी बेचैनी लेकिन यह सूरत तब बदल गयी जब अचानक पता चला कि नागराज मंजुले आ रहे हैं और दिलो-दिमाग पर ख़ुशी और उत्साह की एक महीन सी चादर बिछ गयी। शाम के 5 बजे एक आदमी सामने था, […]

एक ‘भाजपा भक्त’ अखबार का पोस्टमार्टम!

दैनिक जागरण भारत का एक प्रमुख हिंदी अख़बार है. इंडियन रीडरशिप सर्वे में इसकी रीडरशिप शीर्ष पर आती रही है. यह हिंदी लिखने-पढ़ने वालों की दुनिया में एक चर्चित अख़बार है. हमने गुजरात चुनाव के ठीक एक दिन बाद दैनिक जागरण में चुनाव परिणामों के कवरेज का वैज्ञानिक तरीके से विश्लेषण किया है. यह विश्लेषण […]

हमारे काल देस का ‘तगड़ा कवि’ – विद्रोही

कविता क्या है खेती है, कवि के बेटा-बेटी है, बाप का सूद है, मां की रोटी है मैं तब तक कवितायें पढ़ा करता था जब तक मेरी मुलाकात विद्रोही से नहीं हुई थी; रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’। उनसे मिलने के बाद मैंने कविताओं को सुनना शुरू कर दिया। कविताओं की देह शब्दों में होती है और […]