रे की राय: बैंक वाले मजे में हैं और यह मजा सारी अर्थव्यवस्था टूटकर बिखर जाने तक चलता रहेगा

प्रकाश के रे वरिष्ठ पत्रकार हैं. भारत मे अंतराष्ट्रीय मसलों के चुनिंदा जानकर लोगों में से एक हैं. विश्व राजनीति के साथ-साथ मीडिया, साहित्य और सिनेमा पर भी आप गहरी समझ रखते हैं. _________________________________________________________________________ कार्ल मार्क्स का कहना था कि पैसा इतिहास की धारा तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है और इस पैसे […]

फिल्म रिव्यू: ‘मुक्काबाज’ उत्तर भारतीय दर्शकों के साथ किया गया अब तक सबसे बड़ा धोखा है

मेरे गुरू जी कहते हैं कि कभी भी सिनेमा की समीक्षा उसके तकनीकी पहलुओं पर नहीं करनी चाहिये. सिनेमा एक आर्ट फॉर्म है, जिसमें प्रभावोत्पादकता होती है. फिल्म रिव्यू साधारण दर्शक के लिये लिखे जाते हैं इसलिये फिल्मों की भी साहित्य और संगीत की तरह आलोचना होनी चाहिये, उनकी प्रभावोत्पादकता के लिये. इस भूमिका की […]

2017 अंतिम प्रणाम, भाग-2: शशि कपूर, विनोद खन्ना, टॉम ऑल्टर और तारक मेहता

यह एक ऐसा लेख है जिसकी भूमिका नहीं लिखी जा सकती। दरअसल, यह विदा के बारे में हैं। यह दुःख के बारे में है जो मौन कर देता हैं लेकिन यह लेख लिखा जाना इसलिए जरुरी था क्योंकि यह लेख जिनके बारे में हैं वो शब्दों के साधक थे। उन सबका मानना था कि शब्द […]

2017 अंतिम प्रणाम, भाग-1: कुंवर नारायण, किशोरी अमोनकर, गिरिजा देवी और कुंदन शाह

कुँवर नारायण अभी बाक़ी हैं कुछ पल, और प्यार का एक भी पल बहुत होता है… प्यार की अमरता का गान करने वाले कवि कुंवर नारायण साल 2017 के 15 नवंबर को इहलोक को छोड़ गए। कुंवर नारायण नहीं रहे लेकिन उनके शब्द जिनमें प्रेम, उम्मीद और साहस घनीभूत हैं, हमें प्रेरणा देने के लिए […]

‘राष्ट्र’ में दलितों और स्त्रियों के लिए कोई स्थान नहीं है- नागराज मंजुले

दिन बहुत साधारण था। हवाओं में स्वाभाविक सी ठंड थी और मन में उम्र प्रेरित हलकी सी बेचैनी लेकिन यह सूरत तब बदल गयी जब अचानक पता चला कि नागराज मंजुले आ रहे हैं और दिलो-दिमाग पर ख़ुशी और उत्साह की एक महीन सी चादर बिछ गयी। शाम के 5 बजे एक आदमी सामने था, […]

6 राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके गोविंद निहलानी को दिल्ली बेस्ड भारतीय मीडिया जानता भी नहीं है!

सबसे पहले तो प्रिय पाठकों देरी के लिये हमें क्षमा करें. 19 दिसंबर को गोविंद निहलानी का जन्मदिन होता है और यह आलेख आपको आज पढ़ने को मिल रहा है. ____________________________________________________________________________ एक इंसान के सोचने का तरीका कैसा है! यही निर्धारत करता है कि उस व्यक्ति की समझ कैसी होगी. और उसकी अपने जीवन से […]

भिखारी ठाकुर पहले एक ‘नचनिया’ फिर कवि हैं, जिससे उनके यहां स्त्री-पुरुष का भेद मिट जाता है

सुशांत कुमार शर्मा जेएनयू से हिंदी साहित्य में स्नातक करने के बाद, दिल्ली विश्वविद्यालय से एमफिल पूरी करके वर्तमान में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहे हैं। उत्तर भारत के तीन प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अध्ययन कर चुके रसिकमन सुशांत कुमार शर्मा की साहित्य, समाज और संस्कृति में गहरी रुचि है। ____________________________________________________________________________ उपन्यासकार संजीव […]

आज रिलीज हुई थी गॉडफादर II, जिसमें पहली बार अल पचीनो और रॉबर्ट डी नीरो साथ दिखे थे

कठफोड़वा.कॉम की नई साथी मनुकृति जबलपुर में रहती हैं. ‘जाना था जापान, पहुंच गये चीन’ की तर्ज पर इंजीनियरिंग पढ़ने में ज्यादातर वक्त गुज़ारती हैं जबकि शौक है पॉलिटिकल, क्रिमिलन नॉन फिक्शन नॉवेल्स पढ़ने का. इनका दावा है कि इनके अंदर कुछ रैप्टाइल्स जैसे गुण भी हैं, जैसे घंटों सोना. सोशल मीडिया पर खूब एक्टिव […]

पढ़िये, कैसे देश पद्मावती प्रकरण को क्रिएटिव तरीके से जनता के भले के लिये भुना सकता है?

निर्देशक संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती को लेकर पूरे देश में बहस चल रही है. तमाम पहलुओं पर लोग विचार और टिप्पणियां कर रहे हैं. इस बीच इस लेख को पढ़ा जाये, जो न तो किसी समुदाय विशेष की भावना आहत करने के लिये नहीं लिखा गया, न ही कला की रक्षा की सतही […]