क्या वाकई मंत्री सत्यपाल सिंह और राम माधव चर्च के षड्यंत्र का शिकार हो गये?

इस दुनिया में दो तरह के लोग पाए जाते हैं। पहले वो जो मानते हैं की ईश्वर हर चीज़ का कारण है और दुनिया उसी ने बनाई है। ये लोग ‘क्रियेशनिस्ट’ या ‘निर्माणवादी’ कहलाते हैं। दूसरे वो जो मानते हैं कि पूरा ब्रह्मांड परिवर्तनशील है। जैसा ये आज है वैसा पहले नहीं था, न आगे […]

क्या अरविंद केजरीवाल के अंदर शुरुआत से ही सत्ता के लिये किसी भी समझौते की प्रवृत्ति रही है?

अरविंद केजरीवाल ने अरूणा राय की बात नहीं मानी। योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण समेत बहुतों ने उनकी बात नहीं मानी क्योंकि उन्हें लगा कि सोशल मीडिया के माध्‍यम से युवाओं का जो विशाल समर्थन मिल रहा है उसे सुव्‍यवस्थित आंदोलनों में बदलकर और उसका सही राजनीतिक प्रबंधन कर वैकल्पिक राजनीति खड़ा करने का प्रयोग […]

नज़र: राहुल का कांग्रेस अध्यक्ष बनना सांप्रदायिक राजनीति को क्यों बढ़ावा देगा?

आजकल सुर्ख़ियों में बाबरी मस्ज़िद की ढहने की कहानी है। कुछ लोग उस दौर को याद कर अपने कारनामें पर शर्मिंदा हो रहे हैं तो कुछ अब भी उसे रामराज्य स्थापित करने की कोशिश में शानदार पड़ाव मानते हैं और कुछ उसे हिन्दू आतंकवाद की शुरुआत मानकर ‘हिन्दुत्व’ को गरियाने में लगे हैं। लेकिन मुझे […]

उनके लिए, जो संविधान को उधारी का आइटम या बाहर से चेंपा गया बताते हैं

आज बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर की पुण्यतिथि है। इस मौके पर अम्बेडकर को लेकर सोशल मीडिया पर खूब लिखा जा रहा है। कई पोस्ट्स को देखकर हैरानी हुयी कि अम्बेडकर से जुड़ी वह सभी झूठी बातें जो सवर्णवादी दुराग्रही समाज में अफवाह के तौर पर अभी तक जिंदा है उन्हें सोशल मीडिया के जरिये स्थापित तथ्य […]

प्रधानमंत्री का ‘किसानों की दोगुनी आय’ के लिए पेश रोडमैप क्यों बिल्कुल खोखला है?

लोकतांत्रिक राजनीति कई मायनों में खास है. एक खासियत ये भी है कि काफी वक्त से दबे पर जरूरी सवालों को नागरिक समाज संघर्ष के जरिए उभार सकता है. राजनीति उन सवालों की सुनवाई करती है. और सत्ता में बैठा, वाक्पटु नेता लुभावने जुमलों के जरिए सवालों से बच निकलने की कोशिश करता है. ताकि […]