संपादकीय: सवा दो करोड़ देशवासी नहीं रहे फिर भी हम मुर्दा शांति से क्यों भरे हैं?

हम असम को नहीं जानते. बस मानचित्रों, किताब के कुछ पन्नों और अख़बार की सुर्ख़ियों से असम का हल्का-फुल्का परिचय हासिल किया है. यह परिचय भी केवल नाम और राजधानी छोड़कर यादों के कोने में बहुत देर नहीं टिकता. लेकिन भारतीयता का एक जुड़ाव है, जो बिना जाने, सोचे-समझे असम से एक लगाव के रूप […]

भारत में साढ़े दस लाख हेल्थ से जुड़े सेंटर फिर हम हेल्थ में फिसड्डी क्यों?

हमारी रोजमर्रा की बहसों में अक्सर स्वास्थ्य का मुद्दा हाशिए पर ही रहता है। फिर एक हादसा होता है और लोग राजनीति को कोसने लगते हैं कि उसने आधारभूत मुद्दों को इग्नोर किया। फिर हम स्वास्थ्य को जीडीपी में उसपर किये गये खर्चे के हिसाब से मापकर आलोचना करते हैं। मांग होती है सरकार स्वास्थ्य […]