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रे की राय: त्रिपुरा में बीजेपी की जीत के क्या मायने हैं?

प्रकाश के रे वरिष्ठ पत्रकार हैं. भारत मे अंतराष्ट्रीय मसलों के चुनिंदा जानकर लोगों में से एक हैं. विश्व राजनीति के साथ-साथ मीडिया, साहित्य और सिनेमा पर भी आप गहरी समझ रखते हैं. _____________________________________________________________________ उदारवादी और वामपंथी ख़ेमे में त्रिपुरा (Tripura) में भाजपा (BJP) की जीत और वाम मोर्चे की हार के बाद सबसे सतही, […]

क्या वाकई मंत्री सत्यपाल सिंह और राम माधव चर्च के षड्यंत्र का शिकार हो गये?

इस दुनिया में दो तरह के लोग पाए जाते हैं। पहले वो जो मानते हैं की ईश्वर हर चीज़ का कारण है और दुनिया उसी ने बनाई है। ये लोग ‘क्रियेशनिस्ट’ या ‘निर्माणवादी’ कहलाते हैं। दूसरे वो जो मानते हैं कि पूरा ब्रह्मांड परिवर्तनशील है। जैसा ये आज है वैसा पहले नहीं था, न आगे […]

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संपादकीय: कासगंज के ‘हिंदू’ लड़के को किसने मारा?

कासगंज (Kasganj) में कल एक लड़के की जान चली गई. एक सांप्रदायिक (Communal) बताए जा रहे हंगामे के दौरान पथराव हुआ, गोलियां चलीं, आगजनी हुई और इसी सब के बीच एक चन्दन गुप्ता (Chandan Gupta) मर गया. यह सब उस दिन हुआ, जब हम विधिसम्मत व्यवस्था में शामिल होने की तारीख का जश्न मना रहे […]

इस रिपोर्ट को पढ़ें, फिर कभी नहीं पूछेंगे कि सुभाष चंद्र बोस की मौत कैसे हुई थी?

सुभाष चन्द्र बोस आजादी की लड़ाई के सबसे मुखर और ओजस्वी नाम माने जाते हैं. उन्होंने न केवल देश में रहते हुए अपने विश्वासों के आधार पर आजादी की लड़ाई में योगदान दिया बल्कि विदेशी धरती पर रहकर भी भारत मुक्ति के प्रयासों में संलग्न रहे. पर अफसोस पिछले कुछ वर्षों में उनके जीवन का […]

‘टॉप टेन यू टर्न’- इन दस मुद्दों पर मोदी सरकार ने देश को बुरी तरह गुमराह किया

अमेरिकन अख़बारों में एक बेहतरीन चलन है. वह उम्मीदवार द्वारा चुनाव से पहले किये जाने वाले दावों/वादों की कठोर समीक्षा करते हैं. कई बार अखबार वादाखिलाफी या मुद्दों पर स्टैंड में बदलाव को ले कर लम्बे समय तक अभियान चलाते हैं. अपने देश में भी ऐसा पत्रकारीय काम यदा-कदा होता रहा है. राजनीतिक वादाखिलाफी को […]

संघ और वामपंथी संगठन साथ आये, मिलकर भाजपा सरकार से भिड़ने की तैयारी

विचारधारात्मक मतभेदों को भुलाते हुये महाराष्ट्र की सभी लेबर यूनियन साथ आ गई हैं. ये महाराष्ट्र के श्रम विभाग के फैक्ट्रियों को बंद करने में आसानी के नये नियमों का विरोध कर रहे हैं. बताते चलें कि महाराष्ट्र देश का सबसे ज्यादा औद्योगिक प्रदेश है. इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के अनुसार शनिवार को नासिक […]

दैनिक जागरण ऐसे ही पत्रकारिता करता रहा तो तीसरा विश्वयुद्ध कभी नहीं होगा

आजकल इलेक्ट्रॉनिक और वेब मीडिया की तरह प्रिंट की पत्रकारिता भी बेहद जल्दबाजी में की जा रही है. मीडिया जगत में आपाधापी का यह ऐसा दिलचस्प दौर है, जिसमे हिंदी पत्रकारिता के सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले अखबार भी शामिल हैं. दैनिक जागरण हिंदी बेल्ट का सबसे ज्यादा चर्चित अखबार है. हम आपको इसी अखबार […]

क्या अरविंद केजरीवाल के अंदर शुरुआत से ही सत्ता के लिये किसी भी समझौते की प्रवृत्ति रही है?

अरविंद केजरीवाल ने अरूणा राय की बात नहीं मानी। योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण समेत बहुतों ने उनकी बात नहीं मानी क्योंकि उन्हें लगा कि सोशल मीडिया के माध्‍यम से युवाओं का जो विशाल समर्थन मिल रहा है उसे सुव्‍यवस्थित आंदोलनों में बदलकर और उसका सही राजनीतिक प्रबंधन कर वैकल्पिक राजनीति खड़ा करने का प्रयोग […]

रोहित वेमुला की मां ने कहा, आंध्र प्रदेश की टीडीपी-भाजपा सरकार दलितों के प्रति लापरवाह

रोहित वेमुला की मां ने कहा कि ‘रोहित की मौत देश के लिए दलितों के साथ एकजुटता से खड़े होने का संदेश है.’ आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में दलित छात्र रोहित वेमुला की माँ राधिका वेमुला दलितों के खिलाफ अत्याचार को ले कर मीडिया से बात कर रही थीं. राधिका वेमुला ने कहा कि […]

टेस्ट कीजिये: आप भी किसी नेता के भक्त तो नहीं हैं?

‘भक्त’ आम तौर पर हिंदी भाषा में हिन्दू धर्म के अनुयायिओं के लिए प्रचलित एक शब्द है. यह अनुयायी बगैर किसी संदेह के किसी देव या विचार को आराध्य मान उस पर पूरा यकीन करते हैं. राजनीति में इस शब्द का चलन हुए अभी बहुत ज्यादा समय नहीं हुआ है. साथ ही राजनीति में इसका […]