संपादकीय: सवा दो करोड़ देशवासी नहीं रहे फिर भी हम मुर्दा शांति से क्यों भरे हैं?

हम असम को नहीं जानते. बस मानचित्रों, किताब के कुछ पन्नों और अख़बार की सुर्ख़ियों से असम का हल्का-फुल्का परिचय हासिल किया है. यह परिचय भी केवल नाम और राजधानी छोड़कर यादों के कोने में बहुत देर नहीं टिकता. लेकिन भारतीयता का एक जुड़ाव है, जो बिना जाने, सोचे-समझे असम से एक लगाव के रूप […]