पढ़ें कैसे देश के वैज्ञानिकों ने ली राज्यमंत्री सत्यपाल सिंह की क्लास?

यह पत्र देश के चुनिंदा वैज्ञानिकों ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री सत्यपाल सिंह को कुछ दिन पहले उनके एक विवादित बयान के संदर्भ में लिखा है. इस बयान में सत्यपाल सिंह ने कहा था कि ़डार्विन के विकासवाद के सिद्धांत को वैज्ञानिक 30-35 साल पहले ही खारिज कर चुके हैं और इसे पाठ्य-पुस्तकों से हटा […]

अगर आपके बॉस की सैलरी आपसे 40 गुना ज्यादा है तो इसे जरूर पढ़ें

हम जिन ढांचों में बंधकर इस दुनिया को चलाने का काम करते हैं, उन ढांचों की वजह से यह केवल कोरी कल्पना हो सकती है की दुनिया से विषमताओं का अंत हो जाए। लेकिन अगर इसे हल्के में लिया तो विषमताओं की खाई का जन्म होता है। इस बात को जब हम हर लहजे में […]

पुस्तक मेला विशेष: वे किताबें जिनके बिना एक ‘भारतीय’ की बुकशेल्फ हमेशा अधूरी है

विश्व पुस्तक मेले का दिल्ली के प्रगति मैदान में आज से आगाज़ हो रहा है. ऐसे में कई नई-पुरानी किताबों की चर्चा होगी. पर मैं थोड़ा ओल्ड स्कूल हूं और इस मामले में भारतीय चिंतन परंपरा की पारायण विधा को ज्यादा सही मानता हूं. जिसके हिसाब से बहुत सी किताबों को पढ़ने की बजाए कुछ […]

2017 चलते-चलते: साल के पांच उम्दा लेख, जिन्हें पढ़ते हुये समाज बदलने का मन होता है

1. ‘समाज सिर्फ सिक्युरिटी गार्ड्स और पुलिस के भरोसे नहीं चल सकता, आपसी भागीदारी भी बढ़ानी होती है.’ यह लेख हमारे स्वार्थी फैसलों पर हमला करता हैं जिनमें हम अपने हिस्से की दुनिया से दूसरों को खदेड़ देते हैं. नोएडा की ‘महागुन सोसाइटी’ में जब चोरी हुई तो सोसाइटी वालों ने यह फैसला लिया कि […]

टेस्ट कीजिये: आप भी किसी नेता के भक्त तो नहीं हैं?

‘भक्त’ आम तौर पर हिंदी भाषा में हिन्दू धर्म के अनुयायिओं के लिए प्रचलित एक शब्द है. यह अनुयायी बगैर किसी संदेह के किसी देव या विचार को आराध्य मान उस पर पूरा यकीन करते हैं. राजनीति में इस शब्द का चलन हुए अभी बहुत ज्यादा समय नहीं हुआ है. साथ ही राजनीति में इसका […]

जन्मदिन विशेष: महामना का काशी हिन्दू विश्वविद्यालय- एक सपने की मौत

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष पर महामना को पत्र आदरणीय भारतभूषण मालवीय जी, आपको पत्र लिखने की इच्छा बहुत वर्षों से हो रही थी,परंतु इच्छा रह-रहकर बुझ जाती थी। घर-द्वार, रोजी-रोटी के चक्कर में पैर ऐसे फँसे थे कि पूछिये मत। पत्र लिखना मेरा पुराना शौक है- प्रेम-पत्र से लेकर द्वेष-पत्र (कुछ लोग ऐसा […]

1314 स्कूल बंद करने वाले शिक्षामंत्री जी, क्या यह स्कूल आपके सर्वे में नहीं दिखे थे?

दिसंबर की शुरुआत में महाराष्ट्र सरकार ने महाराष्ट्र के 1314 जिला परिषद् स्कूलों को बंद करने का निर्णय लिया. इसकी वजह थी कि इन स्कूलों में 10 या उससे कम छात्र पढ़ते हैं. सरकार केवल इतने छात्रों के लिये स्कूल का खर्च उठाने को तैयार नहीं है हालांकि कम छात्र संख्या के पीछे तर्क यह […]

एक ‘भाजपा भक्त’ अखबार का पोस्टमार्टम!

दैनिक जागरण भारत का एक प्रमुख हिंदी अख़बार है. इंडियन रीडरशिप सर्वे में इसकी रीडरशिप शीर्ष पर आती रही है. यह हिंदी लिखने-पढ़ने वालों की दुनिया में एक चर्चित अख़बार है. हमने गुजरात चुनाव के ठीक एक दिन बाद दैनिक जागरण में चुनाव परिणामों के कवरेज का वैज्ञानिक तरीके से विश्लेषण किया है. यह विश्लेषण […]

बेनेडिक्ट एंडरसन: जिनके विचारों ने दुनिया को देखने का नज़रिया ही बदल दिया

आखिरी बहुज्ञानी: बेनेडिक्ट एंडरसन एक विद्वान और इंसान के तौर पर (रामचंद्र गुहा ने यह लेख करीब दो साल पहले बेनेडिक्ट एंडरसन के देहांत के बाद प्रतिष्ठित अंग्रेजी रिसर्च पत्रिका इकनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली के लिये लिखा था. यहां हम आपके लिए उस लेख का संक्षिप्तानुवाद पेश कर रहे हैं.) बेनेडिक्ट एंडरसन जिनकी दिसंबर, 2015 […]

छोटा पाकिस्तान: दंगों के दंश में डूबा एक शहर

‘कठफोड़वा’ से हमारे साथी विनय आज इस रिपोर्ट के साथ जुड़ रहे हैं. विनय हमारे संस्थापक सदस्यों में से हैं और आज तक कठफोड़वा को प्रोत्साहन और नैतिक बल देते थे. विनय सामाजिक बदलावों के लिये जमकर मेहनत करते हैं पर उन्हें एक्टिविस्ट वाली बाइनरी से विशेष प्रेम नहीं, न ही पत्रकार वाली बाइनरी से. […]