लोकतंत्र में लोगों को अस्मिताओं की राजनीति से सावधान रहना जरूरी है

यह लेख द इंडियन एक्सप्रेस  के द आइडियाज पेज  पर छपे लेख प्राइड एंड प्रेज्यूडिस  की हिंदी में प्रस्तुति है. इस लेख को लिखने वाले बद्रीनारायण, गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान, इलाहाबाद में प्रोफेसर हैं. आप कविताएं भी लिखते हैं. _____________________________________________________________________ स्मृतियों की खुद की राजनीति होती है. जबकि वे एक सामाजिक समूह के […]

संपादकीय: सवा दो करोड़ देशवासी नहीं रहे फिर भी हम मुर्दा शांति से क्यों भरे हैं?

हम असम को नहीं जानते. बस मानचित्रों, किताब के कुछ पन्नों और अख़बार की सुर्ख़ियों से असम का हल्का-फुल्का परिचय हासिल किया है. यह परिचय भी केवल नाम और राजधानी छोड़कर यादों के कोने में बहुत देर नहीं टिकता. लेकिन भारतीयता का एक जुड़ाव है, जो बिना जाने, सोचे-समझे असम से एक लगाव के रूप […]

संपादकीय: अपनी इज्जत अपने हाथ, न्यायपालिका को अब सुधारों की दिशा में सोचना चाहिये

सुप्रीम कोर्ट के जजों द्वारा की गयी प्रेस कॉन्फ्रेंस ऐतिहासिक और अप्रत्याशित थी. हालांकि इसमें ऐसा कोई खुलासा नहीं हुआ, जिसके लिए अमूमन प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाती है. खुलासे की सम्भावना लिए पत्रकार जजों को अपने सवालों से उकसाते रहे लेकिन जज आपनी न्यायिक प्रतिबद्धता को निभाते हुये टस से मस नहीं हुए. प्रेस कॉन्फ्रेंस […]

अगर आपके बॉस की सैलरी आपसे 40 गुना ज्यादा है तो इसे जरूर पढ़ें

हम जिन ढांचों में बंधकर इस दुनिया को चलाने का काम करते हैं, उन ढांचों की वजह से यह केवल कोरी कल्पना हो सकती है की दुनिया से विषमताओं का अंत हो जाए। लेकिन अगर इसे हल्के में लिया तो विषमताओं की खाई का जन्म होता है। इस बात को जब हम हर लहजे में […]

संघ और वामपंथी संगठन साथ आये, मिलकर भाजपा सरकार से भिड़ने की तैयारी

विचारधारात्मक मतभेदों को भुलाते हुये महाराष्ट्र की सभी लेबर यूनियन साथ आ गई हैं. ये महाराष्ट्र के श्रम विभाग के फैक्ट्रियों को बंद करने में आसानी के नये नियमों का विरोध कर रहे हैं. बताते चलें कि महाराष्ट्र देश का सबसे ज्यादा औद्योगिक प्रदेश है. इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के अनुसार शनिवार को नासिक […]

#metoo कैंपेन हज़ारों किमी दूर बैठी एक लड़की को ताकत देता है पर इसका मकसद अधूरा क्यों है?

नवम्बर का महीना! फेसबुक की वर्चुअल वॉल को मैं अपने फ़ोन पर देख ही रहा था कि मेरी नज़र एक स्टेटस पर आकर जम गई। पोस्ट मेरे साथ आईआईएमसी में पढ़ी एक लड़की ने लिखी थी। पोस्ट अपने आप में एक आपबीती थी कि किस तरह उसके बगल में रहने वाले ‘दादू’ ने मात्र सात […]

प्रधानमंत्री का ‘किसानों की दोगुनी आय’ के लिए पेश रोडमैप क्यों बिल्कुल खोखला है?

लोकतांत्रिक राजनीति कई मायनों में खास है. एक खासियत ये भी है कि काफी वक्त से दबे पर जरूरी सवालों को नागरिक समाज संघर्ष के जरिए उभार सकता है. राजनीति उन सवालों की सुनवाई करती है. और सत्ता में बैठा, वाक्पटु नेता लुभावने जुमलों के जरिए सवालों से बच निकलने की कोशिश करता है. ताकि […]