खुलासा: कैसे कांशीराम के झूठ ने मायावती को उत्तरप्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया था?

कल (15 जनवरी को) मायावती का जन्मदिन था. मायावती एक दौर में दलित राजनीति की प्रमुख आवाज रही हैं पर उन्होंने वक्त के साथ अपना आधार खोया भी है. यह लेख उनके जीवन के शुरुआती दौर से रूबरू कराने के साथ ही आपको उनके व्यक्तित्व में समय के साथ आई खामियों की ओर भी ले […]

‘टॉप टेन यू टर्न’- इन दस मुद्दों पर मोदी सरकार ने देश को बुरी तरह गुमराह किया

अमेरिकन अख़बारों में एक बेहतरीन चलन है. वह उम्मीदवार द्वारा चुनाव से पहले किये जाने वाले दावों/वादों की कठोर समीक्षा करते हैं. कई बार अखबार वादाखिलाफी या मुद्दों पर स्टैंड में बदलाव को ले कर लम्बे समय तक अभियान चलाते हैं. अपने देश में भी ऐसा पत्रकारीय काम यदा-कदा होता रहा है. राजनीतिक वादाखिलाफी को […]

संपादकीय: अपनी इज्जत अपने हाथ, न्यायपालिका को अब सुधारों की दिशा में सोचना चाहिये

सुप्रीम कोर्ट के जजों द्वारा की गयी प्रेस कॉन्फ्रेंस ऐतिहासिक और अप्रत्याशित थी. हालांकि इसमें ऐसा कोई खुलासा नहीं हुआ, जिसके लिए अमूमन प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाती है. खुलासे की सम्भावना लिए पत्रकार जजों को अपने सवालों से उकसाते रहे लेकिन जज आपनी न्यायिक प्रतिबद्धता को निभाते हुये टस से मस नहीं हुए. प्रेस कॉन्फ्रेंस […]

अगर आपके बॉस की सैलरी आपसे 40 गुना ज्यादा है तो इसे जरूर पढ़ें

हम जिन ढांचों में बंधकर इस दुनिया को चलाने का काम करते हैं, उन ढांचों की वजह से यह केवल कोरी कल्पना हो सकती है की दुनिया से विषमताओं का अंत हो जाए। लेकिन अगर इसे हल्के में लिया तो विषमताओं की खाई का जन्म होता है। इस बात को जब हम हर लहजे में […]

संघ और वामपंथी संगठन साथ आये, मिलकर भाजपा सरकार से भिड़ने की तैयारी

विचारधारात्मक मतभेदों को भुलाते हुये महाराष्ट्र की सभी लेबर यूनियन साथ आ गई हैं. ये महाराष्ट्र के श्रम विभाग के फैक्ट्रियों को बंद करने में आसानी के नये नियमों का विरोध कर रहे हैं. बताते चलें कि महाराष्ट्र देश का सबसे ज्यादा औद्योगिक प्रदेश है. इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के अनुसार शनिवार को नासिक […]

दैनिक जागरण ऐसे ही पत्रकारिता करता रहा तो तीसरा विश्वयुद्ध कभी नहीं होगा

आजकल इलेक्ट्रॉनिक और वेब मीडिया की तरह प्रिंट की पत्रकारिता भी बेहद जल्दबाजी में की जा रही है. मीडिया जगत में आपाधापी का यह ऐसा दिलचस्प दौर है, जिसमे हिंदी पत्रकारिता के सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले अखबार भी शामिल हैं. दैनिक जागरण हिंदी बेल्ट का सबसे ज्यादा चर्चित अखबार है. हम आपको इसी अखबार […]

क्या अरविंद केजरीवाल के अंदर शुरुआत से ही सत्ता के लिये किसी भी समझौते की प्रवृत्ति रही है?

अरविंद केजरीवाल ने अरूणा राय की बात नहीं मानी। योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण समेत बहुतों ने उनकी बात नहीं मानी क्योंकि उन्हें लगा कि सोशल मीडिया के माध्‍यम से युवाओं का जो विशाल समर्थन मिल रहा है उसे सुव्‍यवस्थित आंदोलनों में बदलकर और उसका सही राजनीतिक प्रबंधन कर वैकल्पिक राजनीति खड़ा करने का प्रयोग […]

2017 चलते-चलते: साल के पांच उम्दा लेख, जिन्हें पढ़ते हुये समाज बदलने का मन होता है

1. ‘समाज सिर्फ सिक्युरिटी गार्ड्स और पुलिस के भरोसे नहीं चल सकता, आपसी भागीदारी भी बढ़ानी होती है.’ यह लेख हमारे स्वार्थी फैसलों पर हमला करता हैं जिनमें हम अपने हिस्से की दुनिया से दूसरों को खदेड़ देते हैं. नोएडा की ‘महागुन सोसाइटी’ में जब चोरी हुई तो सोसाइटी वालों ने यह फैसला लिया कि […]

रोहित वेमुला की मां ने कहा, आंध्र प्रदेश की टीडीपी-भाजपा सरकार दलितों के प्रति लापरवाह

रोहित वेमुला की मां ने कहा कि ‘रोहित की मौत देश के लिए दलितों के साथ एकजुटता से खड़े होने का संदेश है.’ आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में दलित छात्र रोहित वेमुला की माँ राधिका वेमुला दलितों के खिलाफ अत्याचार को ले कर मीडिया से बात कर रही थीं. राधिका वेमुला ने कहा कि […]

भारत में साढ़े दस लाख हेल्थ से जुड़े सेंटर फिर हम हेल्थ में फिसड्डी क्यों?

हमारी रोजमर्रा की बहसों में अक्सर स्वास्थ्य का मुद्दा हाशिए पर ही रहता है। फिर एक हादसा होता है और लोग राजनीति को कोसने लगते हैं कि उसने आधारभूत मुद्दों को इग्नोर किया। फिर हम स्वास्थ्य को जीडीपी में उसपर किये गये खर्चे के हिसाब से मापकर आलोचना करते हैं। मांग होती है सरकार स्वास्थ्य […]