हम कौन हैं?

जड़ता के ख़िलाफ़ एक आवाज

दुनिया के मसले काठ की तरह कठोर हैं और जिन कठफोड़वों को इन मसलों पर चोंच मारने का काम सौंपा गया था वो राजा शेर की एक दहाड़ सुनते ही चारण गाना शुरू कर चुके हैं. पर कुछ हैं जो आज भी खट-खट पेड़ों पर चोंच मारे जा रहे हैं. जिन्हें लगता है कि उनके लिए जंगल ज्यादा मायने रखता है न कि शेर का डर. कठफोड़वे भावुक हैं. उन्हें बाजार की समझ नहीं, उन्हें अपने भविष्य की चिंता नहीं. वो बस सामने पड़ी समस्याओं को पूरी तन्मयता से सुलझाने में यकीन करते हैं. आशा करते हैं कि आप सभी साथी इस लड़ाई में उनका साथ देंगे ताकि जंगल को सुरक्षित बचाया जा सके और अंतत: भय से मुक्ति मिले, प्रेम की जीत हो, सहअस्तित्व की जीत हो.

आभार-

एक साथ सालों-साल रहने के बाद हम इंसान एक-दूसरे की सारी अच्छाईयों-बुराईयों को जान जाते हैं या यूं कहें कि एक-दूसरे को बखूबी समझने लगते हैं. ऐसे में कई बार एक-दूसरे को हम कम तवज्जो भी देने लगते हैं. दूसरे शब्दों में कहें तो ‘घर की मुर्गियां दाल बराबर’ हो जाती हैं. पर अगर जो लोग साथ रहे-रहे हों वो औसत दर्जे के न हों तो ऐसी स्थिति नहीं भी आती.

यह वेबसाइट मुख्यत: भारतीय जनसंचार संस्थान के 2015-16 बैच में पढ़ाई के दौरान देखे गये वैकल्पिक मीडिया गढ़ने के सपने का साकार होना है. उस बैच के हम 6 मित्र आज भी साथ हैं और आपस में सभी की सारी अच्छाईयों और बुराईयों से वाकिफ हम सभी एक-दूसरे की दृष्टि पर विश्वास करते हैं और उनके दर्शन का सम्मान भी. इस बात पर हम सभी को गर्व है. वेबसाइट कभी भी मन्शेष और सुमेर के सहयोग के बिना मूर्त रूप नहीं ले पाती. खासकर मन्शेस के जिसने रात-रात भर जागकर दोस्ती का फर्ज अदा किया है.

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