January 12, 2018 By Peeyush Parmar 0

‘असली साहित्य हमेशा पराजितों के बारे में बात करता है’

अम्बर्तो इको, वर्तमान विश्व साहित्य जगत में उत्तर-आधुनिक विचारक्षेत्र के एक प्रमुख रचनाकार थे। जिजीविषा और आनंद को जीवन के केंद्र में रखने वाले इको का जन्म 5 जनवरी 1932 में इटली में हुआ था। उनका प्रसिद्ध उपन्यास ‘The Name of The Rose’ दुनिया की सर्वाधिक बिकने वाली पुस्तकों में से एक है जिसका विश्व की 40 से अधिक भाषाओँ में अनुवाद हो चुका है। इको के लेखन में समय की एक केंद्रीय भूमिका है।

उनके उपन्यास लेखन से लेकर जीवन जीने की दृष्टि तक, सभी मामलों में वे समय को केंद्र में रखते थे। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि अगर सम्पूर्ण ब्रम्हांड से समय को निकाल दिया जाए तो यह हमारी मुट्ठी में समा जायेगा।

वे प्रखर बौद्धिक थे जिन्होंने वर्त्तमान के हर पहलू पर विचार व्यक्त किया जो मानव जीवन और समाज को प्रभावित करते हैं। इको एक ऐसे रचनाकार रहे हैं जो कभी साक्षात्कार से पीछे नहीं हटते थे। शायद इसका कारण उत्तर-आधुनिकता का संवाद प्रिय होना है। आज उनके जन्मदिन पर उनकी स्मृति में ‘The Guardian’ को दिए गए एक साक्षात्कार के अंश का अनुवाद प्रस्तुत है:

 

“मैं एक दार्शनिक हूँ। मैं केवल सप्ताहांत में उपन्यास लिखता हूँ। एक दार्शनिक के रूप में, मेरी रूचि सत्य में है। चूंकि यह निर्धारित करना बहुत कठिन है कि क्या सत्य हैऔर क्या नहीं? मैंने पाया कि झूठ का विश्लेषण करके सत्य तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। मेरा यह मत है कि पचास प्रतिशत से अधिक जन-अवधारणाएँ झूठ से गढ़ी जाती हैं। हम उनके द्वारा ब्लैकमेल किये जाते हैं।”

 

“मैं नहीं जानता कि पाठक क्या अपेक्षा रखते हैं। लेकिन मैं सोचता हूँ कि एक लेखक को वह लिखना चाहिए जिसकी पाठक ने अपेक्षा भी ना की हो। पाठक ने वैसा सोचा भी न हो। समस्या यह नहीं है कि उन्हें क्या चाहिए बल्कि चुनौती यह है कि उसे बदला कैसे जाए … वैसे पाठक कैसे तैयार किये जाएँ जिन्हें आप अपनी प्रत्येक कहानी के लिए जरुरी मानते हैं।”

 

“मैं इस बात से इंकार नहीं कर रहा हूँ कि षणयंत्र होते हैं, लेकिन असली षणयंत्र वह हैं जो सामने आ जाते हैं। जुलिअस सीजर की हत्या एक षणयंत्र थी – यह एक सफलता थी, यह प्रसिद्द भी है … गन पॉवडर एक षणयंत्र था। इसीलिए असली षणयंत्र हमेशा सामने आ जाते हैं और लोग उनके बारे में जानते हैं। सफल और शक्तिशाली षणयंत्र वह होते हैं जो होते ही नहीं है। आप यह समझा नहीं सकते हैं कि उनका कोई अस्तित्व ही नहीं है। इसीलिए ये जनमानस के बीच प्रवाहित होते रहते हैं और मुर्ख लोगों का पोषण करते रहते हैं।”

 

“ज्ञान का आनंद पराजितों के लिए सुरक्षित है। यही साहित्य है। दॉस्तोएव्स्की पराजितों के बारे में लिख रहे थे। इलियड का मुख्य पात्र, हेक्टर एक हारा हुआ नायक है। विजयी लोगों के बारे में बात करना बहुत बोरिंग काम है। असली साहित्य हमेशा पराजितों के बारे में बात करता है। मैडम बोवारी एक पराजित है। जूलियन सोरेल एक पराजित था। मैं भी वही काम कर रहा हूँ। पराजित अधिक आकर्षक हैं। विजयी बेवकूफ होते हैं क्यों कि अक्सर वे बाई चांस जीत जाते हैं।”

 

“सच्चाई ज्यादा रोमांचक है क्योंकि यह कथा-गल्प से अधिक नवाचारी है।”

 

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